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सर्वाइकल कैंसर पर WHO की बड़ी चेतावनी: HPV वैक्सीन और समय पर स्क्रीनिंग से बच सकती हैं लाखों महिलाओं की जान

 


नई दिल्ली/जिनेवा: दुनिया भर में महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बार फिर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि यह उन चुनिंदा कैंसरों में शामिल है जिन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है, बशर्ते समय पर HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन, नियमित स्क्रीनिंग और शुरुआती इलाज सुनिश्चित किया जाए। WHO के अनुसार यदि सभी देशों में टीकाकरण और जांच कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू किए जाएं, तो भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर आज भी महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण बना हुआ है, विशेषकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में। भारत भी उन देशों में शामिल है जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में महिलाओं में इस बीमारी का पता चलता है। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच और टीकाकरण से इस बीमारी के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

क्या है सर्वाइकल कैंसर?

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में विकसित होने वाला कैंसर है।

अधिकांश मामलों में इसका संबंध ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण से पाया जाता है।

HPV एक सामान्य वायरस है, जो कई प्रकार का होता है। इनमें से कुछ प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

हालांकि HPV संक्रमण होने का मतलब यह नहीं कि हर महिला को कैंसर होगा। अधिकांश संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं समाप्त कर देती है, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है।

WHO ने क्यों जताई चिंता?

WHO का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह रोके जा सकने वाले कैंसरों में शामिल है।

इसके बावजूद दुनिया भर में हर वर्ष लाखों नए मामले सामने आते हैं और बड़ी संख्या में महिलाओं की मृत्यु हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह समय पर जांच न होना, टीकाकरण की कम पहुंच और शुरुआती लक्षणों की अनदेखी है।

यदि शुरुआती चरण में बीमारी का पता चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

HPV वैक्सीन क्यों है महत्वपूर्ण?

WHO ने HPV वैक्सीन को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम बताया है।

यह वैक्सीन उन HPV प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करती है जो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में, यौन जीवन शुरू होने से पहले टीकाकरण सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।

हालांकि कई देशों में आयु और राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग दिशानिर्देश लागू हैं।

नियमित स्क्रीनिंग क्यों जरूरी?

टीकाकरण के साथ-साथ नियमित स्क्रीनिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

डॉक्टरों के अनुसार स्क्रीनिंग से गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती बदलावों का पता लगाया जा सकता है।

यदि इन बदलावों का समय रहते इलाज कर दिया जाए तो कैंसर बनने की संभावना काफी कम हो जाती है।

इसी कारण विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह देते हैं।

किन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार—

  • जिन महिलाओं की आयु अधिक है।

  • जिनमें HPV संक्रमण पाया गया हो।

  • जिनकी नियमित स्क्रीनिंग नहीं हुई हो।

  • जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो।

  • जिनमें लंबे समय तक संक्रमण बना रहे।

उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच करानी चाहिए।

शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में सर्वाइकल कैंसर कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकता है।

बीमारी बढ़ने पर कुछ महिलाओं में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • असामान्य योनि रक्तस्राव।

  • मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव।

  • रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव।

  • श्रोणि (पेल्विक) क्षेत्र में दर्द।

  • असामान्य योनि स्राव।

  • संभोग के दौरान दर्द या रक्तस्राव।

हालांकि ये लक्षण केवल सर्वाइकल कैंसर के ही नहीं होते, इसलिए इनके दिखाई देने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

भारत में स्थिति

भारत में महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर का महत्वपूर्ण स्थान है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, नियमित जांच की अनुपलब्धता और देर से अस्पताल पहुंचने के कारण कई मामलों का पता उन्नत अवस्था में चलता है।

इसी कारण स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न संस्थाएं महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं।

किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञ महिलाओं को सलाह देते हैं—

  • HPV वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से जानकारी लें।

  • नियमित स्त्री रोग जांच कराएं।

  • स्क्रीनिंग की सलाह का पालन करें।

  • किसी भी असामान्य रक्तस्राव को नजरअंदाज न करें।

  • व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें।

  • संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

  • धूम्रपान से बचें।

समय पर इलाज से बढ़ती है सफलता

डॉक्टरों का कहना है कि यदि सर्वाइकल कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी अधिक होती है।

आज आधुनिक चिकित्सा में सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और अन्य उन्नत उपचार उपलब्ध हैं।

इलाज का तरीका बीमारी की अवस्था और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है।

यदि महिलाएं नियमित जांच कराएं, टीकाकरण के बारे में जानकारी रखें और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो इस बीमारी से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सर्वाइकल कैंसर ऐसी बीमारी है जिसे समय पर HPV टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और शुरुआती उपचार के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

भारत सहित दुनिया के कई देशों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। यदि टीकाकरण, नियमित जांच और समय पर इलाज को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में बड़ी कमी लाई जा सकती है और लाखों महिलाओं का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है।

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